शरीयत अदालतों को गैर कानूनी घोषित करने व मुस्लिम महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय:- शरीयत अदालतों को गैर कानूनी घोषित करने व मुस्लिम महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने की मांग।
महोदय,
निम्नलिखित तथ्यों पर ध्यान आकर्षित करने की कृपा करें:-
1. इस्लाम में तलाक देने का एकाधिकार सिर्फ पुरुषों के पास है जबकि महिलाओं को उनसे कम अक्ल माना जाता है । तलाक देने का (पुरुषों का) विशेषाधिकार जरा भी प्रभावित नहीं होगा । यह एक गम्भीर मसला है जिसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने अपने 395 पन्नों के फैसले में सुलझाया नहीं ।
2. बेहतर यह होता कि सुप्रीम कोर्ट यह व्यवस्था देता कि शौहर को तलाक के लिए अदालत में ही मामला दाखिल करना होगा और दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह सुनने के बाद अदालत में तलाक दिया जाए । इससे अदालतें मुस्लिमों में तलाक को लेकर जुड़ी सभी समस्याओं का हल निकाल सकती और इस्लामिक धर्मगुरुओं के पास आलोचना करने की कोई वजह नहीं होती । बाईस मुस्लिम देश एक बार में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा चुके हैं ।
3. जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना महमूद मदनी ने कहा, ‘अदालती आदेश के बावजूद तीन तलाक को शरीयत कानूनों से संरक्षण मिलता रहेगा ।’ नेता मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का धार्मिक मुसलमानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा ।
4. यह सम्भव है कि जो मुसलमान शरीयत कानूनों को मानते हैं वे भारतीय अदालतों की अनदेखी कर सकते हैं और इस्लामिक संगठनों द्वारा संचालित अदालतों में अपने तलाक सम्बंधी मामलों को ले जा सकते हैं ।
उपर्युक्त मतों के आलोक में निवेदन है कि देश में कार्यरत सैंकड़ों शरीयत अदालतें गैर-कानूनी घोषित की जाएँ और यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि वे सब निरस्त हो जाएँ अन्यथा मुस्लिम माताएँ और बहनें प्रताड़ित होती रहेंगी ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री