विवाह पंजीकरण से परेशानी क्यों।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- विवाह पंजीकरण से परेशानी क्यों ।

महोदय,
मुस्लिम महिला अधिकार कार्यकर्ता सुश्री नाइश हसन ने विवाह के अनिवार्य पंजीकरण के सम्बंध में विद्वत्तापूर्ण ढंग से विषय का विवेचन किया है । उन्होंने लिखा है कि ईसाइयों और पारसियों पर लागू वैवाहिक कानून के तहत शादी का पंजीकरण अनिवार्य है और ओड़िशा में मुस्लिम विवाह और विवाह विच्छेद पंजीकरण अधिनियम 1949 में बना था । अनिवार्य पंजीकरण से बाल विवाह की रोकथाम, विवाह की न्यूनतम आयु सुनिश्चित होना, गैर-कानूनी बहु-विवाह की जाँच, विवाहित महिलाओं को अपने वैवाहिक घर में रहने, भरण-पोषण भत्ते आदि का अधिकार प्राप्त करने और विधवाओं को उनके विरासत के अधिकार आदि हासिल करने में मदद मिलेगी, साथ-साथ अभिभावकों को बेटियों की शादी के नाम पर उन्हें बेचने से रोका जा सकेगा ।
सुश्री नाइश हसन के अनुसार विवाह के साथ ही तलाक का पंजीकरण भी अनिवार्य होना चाहिए । मुसलमानों के मजहबी संगठन मजहबी आजादी में दखल बताकर इसका विरोध कर रहे हैं, उनका विरोध निरर्थक है ।
निवेदन है कि इस विषय में हिन्दू धार्मिक संस्थाओं और सांस्कृतिक संगठनों से विचार-विमर्श करके यथोचित निर्णय किया जाए । इस सम्बंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।
सादर, भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री