मुस्लिम असुरक्षा पर अनावश्यक प्रश्न ।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- मुस्लिम असुरक्षा पर अनावश्यक प्रश्न ।

महोदय,
कृपया निम्नलिखित तत्थों का संज्ञान लेने की कृपा करेंः-
1. पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपनी विदाई के क्षणों में दलित, मुस्लिम और ईसाइयों में असुरक्षा के सम्बंध में जो विचार 7 अगस्त, 2017 को बेंगलूरू में और फिर 10 अगस्त, 2017 को राज्यसभा टीवी पर व्यक्त किए, उन विचारों ने देश की जनता को मायूस किया ।
2. डॉ. राधाकृष्णन के बाद वह पहले उपराष्ट्रपति थे, जिन्हें दो कार्यकाल मिले ।
3. क्या जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो मुस्लिम सुरक्षित थे ?
4. ऐसी कौन-सी बात है, जिससे मुस्लिम असुरक्षित हैं जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है क्योंकि समाज में उन्हें कुछ भी कहने और करने का हक ही नहीं, बल्कि अवसर भी हैं ।
5. हर शहर के कुछ खास इलाकों में मुस्लिमों का जनसंख्या घनत्व बेतहाशा बढ़ जाता है और फिर उस क्षेत्र में जाने में आम हिन्दू भी असहज महसूस करने लगते हैं ।
6. मुस्लिम बाहुल्य मौहल्लों में से असुरक्षा बोध से हिन्दू परिवार धीरे-धीरे मकान बेचकर सुरक्षित मौहल्लों में जाने लगते हैं ।
7. ऐसे मौहल्लों में पुलिस और प्रशासन भी हाथ डालने से कतराते हैं ।
8. यह प्रवृत्ति कुछ शहरों में चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है, हिन्दू-मुस्लिम बस्तियों का ऐसा सपाट विभाजन रोकने और इससे उपजी दूरी को कम करने का कोई प्रयास नहीं करता ।
9. हमारे नेता मुस्लिम असुरक्षा को तो सेक्यूलर राजनीति के आइने में देख लेते हैं । किन्तु हिन्दू असुरक्षा का क्या ?
10. देश में मुस्लिम हितों की बात करना और इस्लाम की दुहाई देना तो सेक्यूलर है, लेकिन हिन्दू हितों की बात करना और हिन्दुत्व साम्प्रदायिक मान लिए गए हैं ।
हमारा निवेदन है कि –
1. शहरों में मुस्लिमों के अलग मौहल्ले दिल्ली में भी हैं, जैसे – ओखला, पश्चिमी निजामुद्दीन, नबी करीम, दरियागंज, जामा मस्जिद, गाजीपुर आदि । इन क्षेत्रों में रह रहे हिन्दू परिवार मुसलमानों के दबदबे और क्रूर व्यवहार से तथा लड़कियों को उठा लेने की धमकियों से घबराकर औने-पौने दामों में घर बेचकर उत्तर प्रदेश के कैराना कस्बे की तरह ही अन्यत्र भाग रहे हैं । विशेषज्ञों और चिंतकों के समूहों से विचार करके देश विभाजन से पहले के इन तौर-तरीकों को रोकने और उनसे निबटने के उपाय अपनाने की कृपा करें ।
2. सरकार विभिन्न भारतीय भाषाओँ में पुस्तकें प्रकाशित करके यह सिद्ध करे कि हिन्दुस्थान में मुसलमान दुनियाँ के मुस्लिम देशों से भी अधिक सुरक्षित हैं, उनकी जनसंख्या तेजी से ज्यामितीय श्रेणी के अनुसार बढ़ रही है और उन्हें बहुसंख्यकों की तुलना में अनेक अतिरिक्त सुविधाएँ और अधिकार मिले हुए हैं, जिनका वे उपभोग कर रहे हैं और उनके मुल्ला-मौलवी बेबाक बकवास कर रहे हैं और उन पर कोई दण्डात्मक कार्रवाई नहीं की जाती ।
3. मुसलमानों के मुल्ला मौलवियों को धर्मगुरु, कुरान को धर्म पुस्तक और इस्लाम को धर्म बोलना-लिखना बंद होना आवश्यक है और कुरआन को मजहबी किताब तथा इस्लाम को मजहब बोला और लिखा जाए ।
शीघ्र निर्णय करने की कृपा करेंगे ऐसा विश्वास है ।

सादर, भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री