बहुविवाह, तलाक-ए-एहसन एवं तलाक-के-हसन कुप्रथा पर तत्काल रोक लगाने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- बहुविवाह, तलाक-ए-एहसन एवं तलाक-के-हसन कुप्रथा पर तत्काल रोक लगाने की मांग।

महोदय,

तीन तलाक की क्रूर प्रथा के समाप्त कर दिए जाने के पश्चात् मुसलमानों के घर में यातना पा रहीं माताओं और बहनों की वर्तमान स्थिति का संज्ञान लेने की कृपा करेंः-
1. यदि पति तलाक देना चाहेगा तो वह एक झटके में तीन बार तलाक बोलकर तो तलाक नहीं दे पाएगा, लेकिन वह नगर पालिका के चेयरमैन अथवा इसी तरह के किसी जन प्रतिनिधि को पत्र भेजकर यह घोषणा कर सकता है कि वह पत्नी को तलाक देने की घोषणा कर रहा है । सिर्फ पत्र मिलने के कुछ दिन बाद ही तलाक हो जाएगा । सरकारी दस्तावेजों में उसका नाम दर्ज हो जाएगा कि अब वह अविवाहित है । किसी भी पुरुष के लिए ऐसा करना कठिन कार्य नहीं होगा ।
2. पति पर आश्रित महिलाएँ तलाक को लेकर बड़ी भयभीत रहती हैं ।
3. पुरुषों को तो तलाक देने का अधिकार है लेकिन महिलाओं को यह अधिकार नहीं है ।
4. भारतीय मुस्लिम कानून में विवाह, तलाक, सन्तान का दायित्व, उत्तराधिकार आदि में महिलाओं को समान अधिकार नहीं हैं ।
5. तीन तलाक के बाद बहु-विवाह भी बंद होना चाहिए ।
6. गणतांत्रिक दकियानूसी और भेदभाव वाले कानूनों का कोई स्थान नहीं हो सकता ।
7. तमाम (मुस्लिम) महिलाएँ पति की पिटाई खाकर भी निरीह बन कर साथ रहने को बाध्य होती हैं ।

इस पृष्ठभूमि में निवेदन है कि तलाक-ए-एहसन और तलाक-के-हसन भी संसद में कानून बनाकर निरस्त किए जाएँ और बहु-विवाह प्रथा भी समाप्त की जाए, तो मुसलमानों के घर में घोर अत्याचार सह रहीं माताओं और बहनों को इस जन्म में दोजख की यातनाओं से मुक्ति मिलेगी ।
सादर, भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी)  राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री