दीपावली के अवसर पर पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाने के निर्णय को तत्काल वापस लेने का अनुरोध।

प्रतिष्ठा में,
माननीय मुख्य न्यायधीश
भारत का उच्चतम न्यायालय

विषयः दीपावली के अवसर पर पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाने के निर्णय को तत्काल वापस लेने का अनुरोध।

महोदय,

आपको ज्ञात है कि दीपावली हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं का अति महत्वपूर्ण पर्व है। हमारी परंपरा है कि इस अवसर पर हिन्दू दीये जलाते हैं और पटाखे चलाते हैं। पटाखे चलाने में बच्चों की खास रूचि होती है। दीपावली के दिन पटाखे फोड़ने की परंपरा अति प्राचीन है। जब भगवान राम रावण का अंत कर अयोध्या लौटे थे, उस खुशी में यह त्यौहार पहली बार मनायी गयी थी। अब प्रत्येक वर्ष मनायी जाती है।
परन्तु माननीय उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से दीपावली में दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी पर रोक लग गया है। अब 31 अक्टूबर तक दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी नहीं हो पायेगी। परिणामस्वरूप 19 अक्टूबर को दीपावली के दिन दिल्ली-एनसीआर के लोग पटाखे नहीं जला पायेंगे। उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय से हमारी प्राचीन पंरपरा पर कुठाराघात हो रहा है।
जबकि यह सत्यता है कि पटाखों के अतिरिक्त कई अन्य माध्यमों से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सुचारू नहीं होने से प्रदूषण ज्यादा बढ़ रहा है। बकरीद के दिन लाखों बकरों की बलि के कारण पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। परन्तु इस पर न तो केन्द्रीय प्रदूषण नियंतण बोर्ड का कभी ध्यान गया है और न ही किसी न्यायालय का। लाऊड स्पीकर से अजान पढ़ने के कारण बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। परन्तु इसे आजतक नहीं रोका गया है।
हिन्दूविरोधी लोग लगातार हिन्दुओं के साथ षड्यंत्र करते रहते हैं। बार-बार याचिका दाखिल कर हिन्दू त्योहारों पर आक्रमण हो रहा है। कभी दीपावली पर पटाखा बैन के लिये याचिका, कभी जलीकटटू पर रोक के लिये याचिका कभी नदी में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक के लिये याचिका। हमें डर है कि कभी याचिका दाखिल कर हिन्दुओं के पर्व-त्योहार मनाने पर भी रोक लगावायी जा सकती है।
आपसे अनुरोध है कि हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं की रक्षा करने व दिल्ली-एनसीआर के लोगों को दीपावली हर्षोल्लास के साथ मानने का अवसर प्रदान करने के लिये दीपावली पर पटाखा बैन का आदेश तत्काल वापस लिया जाये। आपसे अनुरोध है कि इस पत्र को ही याचिका मान लिया जाये। सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री